24 जुलाई 2019 - 12:55
ईरान से संभावित टकराव के बारे में विश्व मीडिया अमरीका को क्या चेतावनी दे रहा है? वाॅशिंग्टन को 10000000000000 डाॅलर से अधिक का न

ईरान और अमरीका के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए संसार के विभिन्न संचार माध्यमों ने इसके परिणामों के बारे में अपने आकलन पेश किए हैं।

  • रायुल यौमः अमरीका की गुप्तचर एजेंसी सीआईए ने एक रिपोर्ट तैयार की है जिसमें कहा गया है कि ईरान से युद्ध की स्थिति में अमरीका को होने वाला नुक़सान एक हज़ार अरब डाॅलर से भी अधिक होगा। यही कारण है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प अत्यंत कड़े प्रतिबंध लगा कर ईरानी जनता पर दबाव डालना चाहते हैं ताकि वह अपनी सरकार पर आपत्ति करे और अगले चरण में ईरान के अंदर अमरीका के पिट्ठू सरकार का तख़्ता पलटने की कोशिश करें। हालांकि अमरीका यह आशा पिछले चालीस साल से अपने दिल में लिए हुए है और यह अब तक पूरी नहीं हो सकी है।
  • डेली बीस्टः अगर अमरीका व  ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव होता है तो लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के लड़ाके इस्राईल को लक्ष्य बनाएंगे। हिज़्बुल्लाह के कमांडर पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अगर दबाव जारी रहा तो लेबनान का पर्वतीय इलाक़ा, जो सन 2000 से पहले 15 साल तक हिज़्बुल्लाह व इस्राईल के बीच टकराव का मैदान रहा है, एक बार फिर उबल पड़ेगा।
  • बीबीसीः कुछ टीकाकारों का अनुमान है कि ट्रम्प एक वांछित सहमति के लिए ईरान में भी उत्तरी कोरिया के नेता का माॅडल तैयार किए जाने के इच्छुक हैं। उन्होंने काफ़ी बढ़ चुके तनाव के बीच किम जोंग ऊन से मुलाक़ात करके कूटनैतिक हल्क़ों को आश्चर्यचकित कर दिया था और बड़ी हद तक अपने दृष्टिगत परिणाम को हासिल कर लिया था। अलबत्ता जो टीकाकार इस्लामी गणतंत्र ईरान और आयतुल्लाह ख़ामेनेई के व्यक्तित्व से परिचित हैं, वे इसे ट्रम्प का भ्रम क़रार दे रहे हैं।
  • अलहेवार चैनलः (राजनैतिक टीकाकार, अब्दुल्लाह सैयदी) आज हम सुन रहे हैं कि सऊदी अरब के शासक ने अपने देश में 500 अमरीकी सैनिकों की तैनाती और थाड मीज़ाइल सिस्टम लगाने पर सहमति जता दी है। क्या उनमें विरोध की हिम्मत थी? कितने अफ़सोस की बात है कि सऊदी अरब इतना कमज़ोर हो गया है कि वह अमरीकी सैनिकों से कह रहा है कि वे उसे ईरान के ख़तरे से सुरक्षित रखें। तो वे सारे हथियार क्या हुए जो बिन सलमान ने ट्रम्प से ख़रीदे हैं?